के एफ डब्ल्यू करेगी गंगा की सफाई
भारत की समस्त नदियों में से गंगा एक महत्वपूर्ण नदी है ।यह भारत और बांग्लादेश दोनों देशों को मिलाकर लगभग 2500 किलोमीटर के क्षेत्रफल को सींचती हैं ।गंगा भारत देश की प्राकृतिक संपदा होने के साथ-साथ धार्मिक परिवेश में भी अपना महत्वपूर्ण स्थान रखती है। गंगा नदी लोगों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ी हुई है।
प्रदूषण बढ़ने के साथ-साथ गंगा पहले से काफी ज्यादा प्रदूषित हो चुकी है। इसके लिए समय-समय पर राज्य सरकार व केंद्र सरकार अनेक परियोजना लागू करते हैं मगर उन पर योजनाओं के क्रियान्वयन से प्रदूषण में कमी अप्रत्याशित रूप से देखने को मिलती है।
गंगा की स्वच्छता के लिए अब विदेशी संस्थाएं भी इसके प्रति गंभीर होकर इस सफाई अभियान में अपना योगदान देने का पूर्ण रूप से विचार बना रही है।
इस श्रेणी में जर्मनी के एक प्रतिष्ठित बैंक के एफ डब्ल्यू ने अपना हाथ बढ़ाया है । यह जर्मनी की तीसरी सबसे बड़ी कंपनी है। इसका पूरा नाम जर्मन डेवलपमेंट बैंक है । इसे पुनर्निर्माण क्रेडिट संस्थान भी कहते हैं। इसकी स्थापना सन 1948 में की गई थी।
जर्मन डेवलपमेंट बैंक ने गंगा सफाई और स्वच्छ पेयजल के प्रति गंभीरता को दिखाते हुए भारत सरकार को लगभग 960 करोड रुपए देना निश्चित किया है।
स्वच्छ पेयजल और गंगा की सफाई को दो चरणों में विभाजित किया गया है । पहले चरण की शुरुआत हरिद्वार और ऋषिकेश से होगी । कार्य की प्रगति के अनुरूप जर्मन डेवलपमेंट बैंक के अधिकारियों का एक समूह इस परियोजना के लिए उत्तराखंड सरकार के मुख्य सचिवालय से मिलकर इस पर बातचीत कर इसे आगे बढ़ाने का दावा किया।
उत्तराखंड सचिवालय के मुख्य बैठक में पेयजल के सचिव अरविंद सिंह झांकी, जर्मन डेवलपमेंट बैंक के साउथ एशिया के हेड का कार्ला बर्क, परियोजना नमामि गंगे के निदेशक राघव लंगर के साथ-साथ अन्य अधिकारी मौजूद थे।
जर्मन डेवलपमेंट बैंक के अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना को पूरा करने के लिए उचित ढांचा बना लिया गया है और इसके पहले चरण में उत्तराखंड में सन 2022 तक इस काम को पूर्ण कर लिया जाएगा । इसके साथ-साथ उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में 10 एसटीपी और नेटवर्किंग का भी निर्माण जर्मनी के विशेषज्ञों द्वारा कराया जाएगा ताकि इस परियोजना का पूर्ण लाभ उत्तराखंड सरकार व भारत सरकार को मिलें।
उत्तराखंड सरकार के मुख्य सचिवालय के अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार कुंभ मेला से पहले हम गंगा की पूर्ण सफाई के लिए प्रतिबद्ध है । राज्य सरकार के अधिकारियों ने बताया कि जर्मनी विशेषज्ञ द्वारा व जर्मन तकनीक द्वारा पेय जल को स्वच्छ करने में भरपूर मदद मिलेगी । उन्होंने कहा कि पहले चरण में हरिद्वार व ऋषिकेश की परियोजना को पूर्ण करने के बाद दूसरे चरण में अन्य शहरों को लिया जाएगा जिसमें उत्तराखंड सरकार व जर्मन डेवलपमेंट बैंक साथ मिलकर काम करेंगे।

